पेट्रोल के दाम विमान समान: जनता के हाल बेहाल लेकिन सरकार मालामाल 

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जनता के हाल बेहाल लेकिन सरकार मालामाल

बड़ती महंगाई ने भारतीय आम जनता को हिला के रख दिया है। दिन प्रतिदिन पेट्रोल और डीज़ल के भाव बड़ते ही जा रहे है।
दिल्ली में 80. 73 का पेट्रोल, ये है बिते पाँच दिन के पेट्रोल डीज़ल के भाव –
पेट्रोल     डीज़ल
78.89    70.82
79. 01   71.28
79. 29   71.89
80. 56   72.56
80. 73   72.83
इन बीते पाँच दिनों के आंकड़ों को देखकर आपके समझ आ ही रहा होगा की किस प्रकार पेट्रोलियम के भाव दिन प्रतिदिन बड़ते चले जा रहे है। आजकल के आधुनिक समय में जहा घर से 100 मीटर दूर जाने के लिए भी हम पैदल जाना पसंद नहीं करते और अपने वाहन का इस्तेमाल करते है उस दौरान अगर पेट्रोल और डीज़ल के भाव ऐसे बड़ेगे तो आम इंसान  कैसे गुजरा करेगा ?  सिर्फ पेट्रोलियम उत्पादों से केंद्र और राज्य सरकारों के खजाने में साढ़े पांच लाख करोड़ रुपए की आमदनी हो जाती है। पेट्रोल और डीज़ल की आसमान छूती कीमतों से भले ही आम आदमी खाली हो रहा हो परन्तु पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतों से आ रहे टैक्स से केंद्र और राज्य का खजाना दिनों दिन बढ़ रहा है। इस साल की शुरआत में जनवरी 1 को पेट्रोल के दाम 69. 97 रुपए जबकि डीज़ल 59 .70 के दाम पर बिक रहा था जिससे आम आदमी भले ही खुश न हो लेकिन उसका गुज़ारा हो रहा था परन्तु अगर आज के पेट्रोल के भाव 80.73 और डीज़ल 72.83 पर तो लगता है कि जल्द ही पेट्रोल आम इंसान के लिए लक्ज़री बन जएगा।  जनवरी 2018 से अबतक पेट्रोल में 10.76 और डीज़ल में 13. 13 का इज़ाफ़ा हो चूका है।

आखिर क्या है इस इज़ाफ़े का कारण ? जानिए इस उल्लेख द्वारा।

Why petrol price are rising

क्यों बड़ रहें है पेट्रोल डीज़ल के भाव ?

why petrol price are rising
पेट्रोल डीज़ल में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण जो सामने आया है वह है रुपए में गिरावट। मंगलवार को रुपया अमेरिकी करेंसी डॉलर के मुकाबले साल के सबसे निचले स्तर पर रहा $1 = र72.67 यह अबतक की रुपए में डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड तोड़ गिरावट है।

क्यू भरभराया रुपया ?

why petrol price are rising

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी डॉलर में मज़बूती और रुपए में गिरावट का कारण बना। जैसे जैसे देश भर में विकास होता जा रहा है पेट्रोलियम का इस्तेमाल में भी बढ़ोतरी आती जा रही है और कच्चे तेल की कमी के कारण भाव भड़ते ही जा रहे है। वही पेट्रोलियम के  सप्लीमेंट्स और भारत को टेक्नोलॉजी में मदद करने वाले दो मुख्य देशों में टैक्स विवाद को लेकर भारतीय रुपया और टूटता ही जा रहा है।  चीन और अमेरिका के बिच चल रहे विवादों में भारत के शेयर बाजार पर असर डालते हुए  रुपए को कमज़ोर करने में कोई कमी नहीं छोड़ी है।  और देश में टैक्सों के बड़ती रेट्स, भारतीय गवर्नमेंट पेट्रोलियम पर टैक्स को कम करने के बजाये बड़ाती ही जा रही है जिसकी वजह से पेट्रोल में बढ़ोतरी की भारतीयों को दुगनी मार झेलनी पड़ रही है।

दूसरा कारण जो सामने आता है वह है  देश में हुए घोटाले।

 पिछले दो सालो में हुए कई बड़े घोटालों से आप भी वंचित नहीं होंगे।  पहला साढ़े नौ हज़ार करोड़ रुपए लेकर भागे हुए विजय माल्या का नाम आप सभी ने पिछले साल जरूर सुना होगा।  माल्या द्वारा ली गयी यह सारी  रकम उसने विदेशो में अपना व्यापार बड़ाने और अइयाशियो में उदा दिए और देश से फरार हो गया जिसके कारण विदेशी करेन्सी तो मज़बूत हो गयी परंतु भारतीय रुपया कमज़ोर हो गया।
 इसके बाद दूसरा स्कैम सामने आया नीरव मोदी का जो बारह हज़ार करोड़ लेके देश से फरार हो गए। इन् दो बड़े घोटालो से देश का रुपया देश के बहार चला गया और देश के कर्जे की दर और बड़ गयी जिसके कारण –
* पेट्रोलियम आयत मेहेंगा हुआ
* बढ़ गयी महंगाई
* मेहेंगे हुए बैंको के क़र्ज़
* विदेश यात्रा का खर्च बढ़ा
* देश पर संकट बढ़ा

कैसे होगा पेट्रोल और महंगाई का दाम कम ?

अगर देश से महंगाई और पेट्रोलियम के दामों को गिरना है तो जरुरी है की देश की इकॉनमी को बढ़ाया जाए।  देश की इकॉनमी बढ़ेगी अगर बेरोज़गारी कम हो, अगर हम विदेशी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल बंद करदे तो देश का रुपया देश में ही रहेगा और रुपए में मज़बूती आएगी जिससे महंगाई और पेट्रोलियम दोनों कम होगी।
                                     BY – YASH GARG

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