क्यू पड़ा डॉलर के सामने रुपया कमज़ोर ???

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WHY IS RUPEE FALLING AGAINST DOLLAR?

why is rupee falling against dollar
बड़ती महंगाई ने भारत देश के गरीब और मध्यम वर्गीय लोगों के पसीने छुड़ा दिए है। साल 2014 में केंद्र में मोदी सरकार के आने से पहले हर नेता के जैसे वादे किये थे कि महंगाई कम होगी, देश में बदलाव आएगा लेकिन देश में पेट्रोल डीज़ल के भाव आसमान छुने लगेंगे, रूपये में इतनी भारी गिरावट आना और गरीब व्यक्ति का जीना इतना मुश्किल हो जाएगा महंगाई के चलते ऐसा किसी ने नहीं सोचा था। साल 2014 में जब भारतीय जनता पार्टी केंद्र में आयी थी तब देश का रुपया एक डॉलर के मुकाबले 63 रुपया का था और आज साल 2018 में भारतीय रुपया एक डॉलर के मुकाबले 73 रुपय का है आखिर क्या हुआ अचानक से साल 2018 में जिससे रूपये में इतनी भारी गिरावट को छुआ ? क्या केंद्र सरकार के वादे सिर्फ वादे ही बनके रहेंगे या होंगे पुरे ? जानिए इस उल्लेख द्वारा।
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रूपये के डॉलर के सामने कमज़ोर होने के तीन प्रमुख कारण –

1. डॉलर की आपूर्ति हुई कम –

 रूपये के गिरने का प्रमुख कारण जो सामने आता है वह है देश में डॉलर की पूर्ण आपूर्ति न होना। हमारा देश बहुत सारी चीज़े इम्पोर्ट करता है जिसमे से 70% इम्पोर्ट सिर्फ चीन से भारत में होता है। यहा तक की बहुत सी चीज़े तो ऐसी है जो भारत में बनायीं जा सकती है परन्तु भारी टैक्स लायबिलिटी के चलते देश के नागरिक उत्पादन में हाथ नहीं डालते।  चीन से आने वाली चीज़ो में अनाज, और गैजेट्स सबसे ऊपर है। चीन ने बीते कुछ सालो में टेक्नोलॉजी में मानो महारत हासिल करली हो।
चीन के पास हर गैजेट जैसे की मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप, स्मार्ट वॉच, स्मार्ट टीवी आदि सबका भरपूर उत्पाद है जिससे भारत की जनता न चाहते हुए भी इस्तेमाल करती है क्युकी चीन कम रेट्स में हमें यह माल बेचता है व्ही अगर इन्ही गैजेट्स को भारतीय कंपनियों से पाने के लिए हमें मूल्य ज्यादा चुकाना पड़ता है इसलिए भारतीय जनता चीन के उत्पादों का प्रयोग करना ही ठीक समझती है।
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 अब समझिये की कैसे इससे रूपये पर पड़ता है प्रभाव। चीन भारत को यह माल बेचता भले ही भारतीय करेंसी रूपये के अनुसार है लेकिन वह चीन भारतीय रूपये को स्वीकार नहीं करता।  इसकी जगह पर भारतीय सरकार चीन को डॉलर प्रदान करती है परन्तु डॉलर की आपूर्ति पूर्ण न होने के कारण भारतीय ट्रेडिंग पर प्रभाव पड़ा है जिसके कारण रुपया कमज़ोर होकर 73 रूपये पर पहुँच गया है।
भारत पेट्रोलियम के लिए सऊदी अरब पर निर्भर है और सऊदी अरब भी डॉलर के बदले ही भारत को पेट्रोलियम देता है परन्तु डॉलर की आपूर्ति न होने के कारण भारत में पेट्रोलियम की कमी होने लगी है और पेट्रोल के दामों में इज़ाफ़ा होने लगा है।

2. अमेरिका और चीन के बीच चल रहा ट्रेड वॉर

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पिछले कई दिनों से  हो रहे ट्रेड वॉर से तो आप अनजान न होंगे। अगर फिर भी आपको नहीं पता तो जान लीजिए, बीते कुछ दिन से अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प इस बात को लेकर गरमाये हुए है की भारत और चीन जैसे देशो को सब्सिडी क्यू  प्रदान की जा रही है। वर्ल्ड बैंक भारत और चीन जैसे डेवलपिंग देशो को ट्रडिंग पर कुछ छूट प्रदान करती है जिसे सब्सिडी कहा जाता है।
डोनाल्ड ट्रम्प का मानना है की इससे भारत और चीन जैसे विकसित देशो को न दिया जाये और अगर दिया जाये तो अमेरिका को भी इस सब्सिडी का फायदा चाहिए। इस मुद्दे के कारण अमेरिका ने ट्रेड टैक्सेज में इज़ाफ़ा किया है जिसकी वजह से अमेरिका और चीन में एक अनोखा ट्रेड वॉर शुरू हो गया है जिसके कारण एशिया के कई देशो की करेंसी में डॉलर के मुकाबले भारी गिरावट आयी है जिसमे भारत और चीन दोनों भी शामिल है।

3. भारत में हुए घोटालो ने किया रूपये को डॉलर के सामने कमज़ोर

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भारत के शराब के कारोबारी विजय माल्या और जेवेलरी कारोबारी नीरव मोदी के किये गए हज़ारो करोड़ के घोटाले से तो आप सभी रूबरू होंगे। दोनों के घोटालो की रकम को मिलाया जाए तो हमारे देश से करीब 21000 करोड़ का धन विदेशो में पहुंच गया है। इसके कारण विदेशी ख़ज़ानों में इज़ाफ़ा हुआ और भारतीय रुपया गिरता चला गया।
ख़ुफ़िया सूत्रों की माने तो विजय माल्या और नीरव मोदी दोनों ही भारत के हज़ारो करोड़ रूपये लेकर लंदन भागे है जिसके कारण अमेरिकी डॉलर को मज़बूती मिली और रुपया कमज़ोर हुआ। साथ ही साथ इसके कारण भारत की जी.डी.पी  भी डगमगा गयी है। बैंक्स ने लोगो को देने वाले लोन पर आयत भी भाड़ा दी है जिसके कारण देश में हो रहे  बिज़नेस थप पड़ते जा रहे है और रुपया कमज़ोर होता जा रहा है।
 BY – YASH GARG

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