Statue of Unity – Is It A waste of Money ?

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Statue of Unity - Is It A waste of Money ?

WORLD’S TALLEST STATUE- MADE FOR GOOD OR WASTE OF MONEY?

31 अक्टूबर 2018 को भारत के विकासशील राज्य गुजरात में बने विश्व के सबसे ऊँचे 182 मीटर के स्टेचू ऑफ़ यूनिटी के बारे में तो आप सभी ने सुना होगा। यह स्टेचू भारत के 100 यूनियंस से ज्यादा को साथ लाने वाले   “द आयरन मैन ऑफ़ इंडिया- सरदार वल्लभ भाई पटेल” की प्रतिमा है जिसका निर्माण केंद्रीय सरकार और देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी निरीक्षण के अंतर्गत हुआ है।
यह मूर्ति विश्व की सबसे ऊँची और शानदार है जो चीन के “स्प्रिंग टेम्पल ऑफ़ बुद्धा ” और न्यू यॉर्क के ” स्टेचू  ऑफ़ लिबर्टी ” से कई गुना ऊँचा है। प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार उन्होंने इस मूर्ति का निर्माण भारत को विश्व के समक्ष सम्मान और प्रगति के उद्देश्य से बनवाया है और यह एक अनोखा टूरिस्ट अट्रैक्शन भी होगा। जमीन से करीब 152 मीटर की ऊंचाई तक के लिए एक लिफ्ट का निर्माण भी किया गया है जिससे प्रतिदिन करीब 15000 पर्यटकों को 152 मीटर उचे बने गार्डन से इस भव्य और शानदार स्टेचू ऑफ़ यूनिटी को देखने को मिलेगा। लेकिन इतने निर्माण के लिए आखिर कितने खर्च किए भारत सरकार ने? इसका जवाब है 3000 करोड़।

तीन हज़ार करोड़ का “स्टेचू ऑफ़ यूनिटी “

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देश में विकास और  विदेशो से लिए कर्ज को चुकाने की दुहाई देते हुए भारतीय केंद्रीय सर्कार ने जीएसटी जैसे टैक्स लागु तो कर दिए लेकिन उन टैक्स की रकम से क्या किया ? 3000 करोड़ का स्टेचू बनाया ! क्या यह एक आम बात है कि जिस देश में आज तक कोई सरकार भुखमरी को ख़तम न कर सकी वही विकास के नाम पर 3000 करोड़ रूपए सिर्फ एक स्टेचू बनाने में खर्च कर दिए जाते है और प्रधानमंत्री कहते है की इससे देश में विकास होगा। अरे केसा विकास क्या लोगो को यह मूर्ति रोजगार देगी ?क्या गरीबो का यह मूर्ति पेट भरेगी ?

3000 करोड़ से बन सकती थी कई सरकारी कम्पनीज़

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जहा सरकार दुहाई देती है विकास की वही 3000 करोड़ रूपए सिर्फ एक मूर्ति के निर्माण में खर्च कर देती है और प्रधानमंत्री  कहते है स्टेचू ऑफ़ यूनिटी से भारत को विश्व स्तर पर सम्मान मिलेगा। माना की स्टेचू ऑफ़ यूनिटी के विश्व के सबसे ऊँचा होने के कारण भारत में नया पर्यटक आकर्षण केंद्रित होगा।
लेकिन अगर यही 3000 करोड़ किसी सरकारी कंपनी को खड़ा करने में प्रयुक्त किए जाते तो आज भारत की एक बड़ी युवाओ और बेरोज़गारो की जनसँख्या को रोजगार प्रदान किया जा सकता था जिससे भारत सच में विकास और प्रगति की राहो पर चलते हुए देश से भुखमरी, गरीबी और बेरोज़गारी जैसी कई बड़ी समस्याओ से निजात पा सकता था लेकिन सरकार को सिर्फ प्रगति के नाम पर भाषण देने आते है।

3000 करोड़ से भड़ती देश की जीडीपी होता अर्थव्यवस्था में सुधार

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 आज हमारे पडोसी देश चीन जो हमे पल पल पर युद्ध की धमकियां देता रहता है और हमे शांत रहना पड़ता है क्योकि भारत के ट्रेड मार्किट में चीन के उत्पादों की भारी मात्रा में बिक्री है लेकिन अगर इन्ही 3000 करोड़ रुपयों से चीनी उत्पादों की जगह भारतीय उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग कर देश के मार्केटों में बेचा जाता तो देश की जीडीपी और इकॉनमी में बहुत बड़ा सुधार होता क्योकि कम्पनीज़ के ज़रिए बेरोजगारों को मिलते रोजगार, जिससे उनकी खरीददारी की क्षमता बढ़ती, खुद भारत के उत्पादों कीभारतीय मार्किट में  बिक्री से देश का रुपया देश में ही रहता और तब जाके  भारत देश सही मायनो में विकास करता।

3000 करोड़ से होते किसानो के कर्ज माफ़, देश की फसल में होता सुधार

Statue of Unity - Is It A waste of Money ?
जहॉ भारत देश के किसान पूरा दिन तेज़ धुप में खेत में खेती करते हुए गुजार देते है सिर्फ दो रोटियों के लिए, जहा किसान मात्र पचास हज़ार रूपए का कर्ज न चूका पाने पर आत्महत्या कर लेते है व्ही हमारे प्रधानमंत्री 3000 करोड़ एक स्टेचू बनाने में खर्च करते हुए भाषण देते है कि स्टेचू ऑफ़ यूनिटी देश की प्रगति का एक बड़ा हिस्सा है। अगर इन्ही रुपयों से देश की किसानो के कर्जे माफ़ किए गए होते , या यह रूपए फसल वृद्धि के लिए नई तकनीकों को लेन के लिए इस्तेमाल किए जाते तो शायद भारत में  इस वर्ष फसल पहले से कई गुना बेहतर होती और कोई भी किसान आत्महत्या न करता और तब भारत की जनता  मानती की हाँ सच में  भारत विकास और प्रगति की राहो पर है।
BY- YASH GARG

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