इस नवरात्रे लगाए माँ के पसंदीदा भोग

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nav durga special prasad

इस नवरात्रे लगाए माँ के पसंदीदा भोग

Nav Durga and Special Prasad Offered to Them

माँ दुर्गा का आगमन का समय आ चुका है यानी अब समय है उनके स्वागत की तैयारियों का। यक़ीनन माँ भगवती के स्वागत और उनके पूजन की तैयारियां आप पहले से ही कर रही होंगी। इन नौ दिनों में व्रत, पूजा, भजन, जागरण और भी बहुत कुछ है जो आप कर सकते हैं. इन तमाम प्रयासों  के बीच क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि आप जो पूजा विधि-विधान से कर रहे है वो सही प्रकार से हो रा है या नहीं? अगर अब तक नहीं तो अब दीजिए। इन्ही सभी तैयारी में एक जरूरी बात है, यानी देवी माँ का भोग।

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देवी माँ आपकी पूजा-अर्चना से कितनी प्रसन्न होती है ये माँ के भोग पर भी निर्भर करता है। भोग पूजन तिथि और देवी माँ की पसंद के हिसाब से लगाया जाए तो माता अति प्रसन्न रहती हैं। भगवती को खुश करने में उनके भोग का भी विशेष महत्व है। अब आप सोच रे हैं कैसे करें भोग का चुनाव? लिहाज़ा, जरूरी यह है कि भोग तिथि यानी नवरात्रे के दिनों और देवी की पसंद के अनुसार से ही अर्पित किए जाएं। तो आइये जानते है नौ तिथियों की देवियों और उनके पसंदीदा भोग के बारे में।

घी से होती है शुरुआत

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नवरात्र का पहला दिन माँ शैलपुत्री का होता है। ऐसी मान्यता है कि हिमालय राज की पुत्री माँ शैलपुत्री को सफ़ेद रंग पसंद है। इस दिन माँ भगवती को गाय का शुद्ध देसी घी का भोग लगाया जाता है। जानकारों की मानें तो यह भोग भक्तों को निरोगी रखता है और उनके सारे दुःख ख़त्म कर देता है।

ब्रह्मचारिणी के लिए शक्कर

nav durga special prasadदूसरे दिन यानी माँ भगवती के द्वितीय रूप आप जिस रूप की पूजा-अर्चना करते हैं उन्हें हम माँ ब्रह्मचारिणी कहते हैं। लम्बी उम्र की कामना के साथ माँ ब्रह्मचारिणी को शक्कर, मिश्री या सफ़ेद मिठाई का भोग अर्पित किया जा सकता है।

दूध भाता है माँ चंद्रघंटा को

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नवरात्र के तीसरे दिन यानी तृतीया को माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माँ के इस रूप को दूध, मेवे की खीर या दूध से बनी मिठाइयां जैसे दूध की बर्फी, रबड़ी आदि का भोग लगाया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि इस भोग से माँ खुश होती हैं और उनकी कृपा से भक्तों को दुखों से मुक्ति मिलती है और जीवन आनंदमयी बनता है। भोग के दान का भी विशेष महत्व है. यह कृपा के परस्भाव में वृद्धि करता है।

माँ कुष्मांडा के लिए मालपुआ

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नवरात्र की चतुर्थी को माँ कुष्मांडा की पूजा होती है। माँ की कृपा से मानसिक क्षमता में वृद्धि और निर्णय लेने की क्षमता में बढ़ोतरी होती है। इस तिथि को मालपुआ का भोग लगाना बेहतर होता है। देवी को भोग लगाने के बाद उसका ब्राह्मणों या कन्याओं को दान देना और भी बेहतर होता है।

पंचमी को केला

 

nav durga special prasadनवरात्र के पांचवे दिन यानी पंचमी को स्कंदमाता के रूप में देवी का नमन किया जाता है। स्कंदमाता को केले का भोग अर्पण करने की मान्यता है। माँ की कृपा से शारीरिक कष्टों से राहत मिलती है।

कात्यायनी देवी के लिए शहद

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छठे दिन देवी के जिस रूप को पूजा जाता है, उन्हें आप कात्यायनी देवी के रूप में जानती हैं। देवी को प्रसन्न करने के लिए माँ को शहद और मीठे पाने का नैवेद्य चढ़ाया जाता है। अगर आपके पास शहद नहीं है तो विकल्प के तौर पर शुद्ध देसी घी या मीठा दही का भी भोग लगाया जा सकता है।

गुड़ दिलाएगा माँ कालरात्रि का आशीष

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नवरात्र के सातवें दिन, देवी के रूप माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। इस प्रतिदिन शैतानी शक्ति से बचने के लिए आप माँ को गुड़ का भोग लगा सकते हैं। साथ ही पान के पत्ते पर कपूर, लौंग का भोग लगाया जा सकता है। आप नीबू काटकर भी माँ के चरणों में अर्पित कर सकती हैं।

आंठवे रूप के लिए नारियल

nav durga special prasadमहागौरी को हम देवी के आठवें रूप में पूजते हैं। माँ के इस रूप को नारियल का भोग लगाया जाता है। ब्राह्मण को भी नारियल करने की मांन्यता है. इस भोग से संतान सुख की प्राप्ति होती है।

अंतिम दिन का भोग अनार

nav durga special prasadनवरात्र के अंतिम दिन हम माँ सिद्धदात्रि को पूजते हैं। इस दिन सफ़ेद तिल के लड्डू का भोग लगाया जाता है। अगर तिल के लड्डू नहीं है तो विकल्प के तौर पर आप चावल की खीर प्रयोग में ला सकती हैं। माँ को अनार का भोग लगाने से मृत्यु भय से मुक्ति मिलती है।

 

 

 

 

 

~ स्टैफी ब्रिज़ावार

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