SEC- 377: समलैंगिक संबंध अपराध नहीं, समलैंगिक विवाह को मिली सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी

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धारा 377 के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला

समलैंगिक संबंध अपराध नहीं, समलैंगिक विवाह को मिली सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी

 धारा 377 के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला

धारा 377 के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला

  • समलैंगिक संबंध बनाने वालों के लिए उमंग की लहर उठी।
  • दो बालिगों की सहमति से बनाया गया अप्राकृतिक संबंध जायज है। सुप्रीम कोर्ट
  • LGBT के पक्ष में आया फैसला।
  • क्या होता है समलैंगिकता ?
  • क्या होता है LGBT का मतलब ?

 

नई दिल्ली : जब से सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाह को मंजूरी देते हुए यह बड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया है। तब से चारों और इसी फैसले की चर्चा हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत दो बालिगों की सहमति से बनाया गया अप्राकृतिक संबंध जायज है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि समलैंगिक विवाह संबंध कोई अपराध नहीं है।

धारा 377 के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट का समलैंगिक संबंध को जायज बताते हुए दिए गए फैसले पर पूरे भारत में हर जगह इसकी जायज-नाजायज होने पर बहस चल रही है। कुछ लोग इस फैसले को सही बताते हुए इसके पक्ष में है। तो कोई इसे अपराध बताते हुए इसके खिलाफ है। इन सभी के बीच क्या आप जानते हैं इन कुछ सवालों के जवाब

  • समलैंगिकता क्या होती है ?
  • इसका क्या मतलब है ?
  • यह कैसा संबंध होता है ?
  • क्यों इस संबंध को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जायज ठहराने के बाद भी लोगों में बहस चल रही है ?
  • LGBT का क्या मतलब है ?

 

आइए बताते हैं और रूबरू करवाते हैं  आपको इन सभी सवालों के जवाब से….

धारा 377 के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला

 

समलैंगिकता कैसा संबंध है और इसका क्या मतलब है….

एक ऐसा संबंध जिसमें व्यक्ति का समान लिंग के व्यक्ति के प्रति यौन आकर्षण होना, यही समलैंगिक संबंध कहलाता है। इस संबंध में या तो पुरुष का पुरुष के प्रति ही यौन आकर्षण होता है जिसे हम ‘गे’ कहते हैं।  या महिला का महिला के प्रति ही यौन आकर्षण होता है जिसे हम ‘लैसबियन कहते हैं।  कभी-कभी ऐसा भी पाया जाता है कि पुरुष का महिला और पुरुष दोनों के प्रति  आकर्षण होता है और महिला का भी पुरुष एवं महिला दोनों के ही प्रति आकर्षण होता है। आइए जानते हैं इन सभी में क्या फर्क होता है। यह हम LGBT के मतलब से समझेंगे।

 

क्या है LGBT का मतलब

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LGBT में

L का मतलब लेसबियन है। इसमें एक महिला या लड़की का समान लिंग के प्रति यौन आकर्षण होता है। इस संबंध में दोनों पार्टनर महिला ही होती हैं। कभी-कभी किसी महिला का पुरुष जैसा दिखना या उसके जैसे चरित्र का होना भी पाया जाता है।

G का मतलब होता है गे इस संबंध में दोनों पार्टनर पुरुष ही होते हैं। एक पुरुष या लड़के का अपने समान लिंग के प्रति यौन आकर्षण होना ही गे कहलाता है।

B का मतलब है बाय सेक्सुअल। बाई सेक्सुअल वह व्यक्ति होते हैं जिन्हें दोनों लिंगों के प्रति यौन आकर्षण होता है। अगर वह व्यक्ति महिला है तो उसे महिला और पुरुष दोनों के प्रति यौन आकर्षण होगा। अगर व्यक्ति पुरुष है तो उसे पुरुष और महिला दोनों के प्रति यौन आकर्षण होगा। उन्हें ही हम बाई सेक्सुअल कहते हैं।

T का मतलब है ट्रांसजेंडर जिसे हम किन्नर कहते हैं। किन्नर वह व्यक्ति होते हैं जिनके अंदर पुरुष और महिला दोनों के ही गुण पाए जाते हैं।

 

क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला एलजीबीटी (LGBT) के पक्ष में

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 6 सितंबर 2018 को भारतीय दंड संहिता की 377 धारा की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुनाया। अपने यह फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दो बालिगों की सहमति से बनाया गया प्राकृतिक संबंध जायज है।

आई पीसी की धारा 377 गैरकानूनी है। यह कोई अपराध नहीं है। समलैंगिकता अपराध नहीं है यौन प्राथमिकता जैविक और प्राकृतिक है।

 धारा 377 के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायमूर्ति की पीठ ने गुरुवार को अपना फैसला बदल कर एक नया इतिहास रचा। उन्होंने कहा धारा 377 गैरकानूनी और मनमानी धारा है। एलजीबीटी के व्यक्तियों को भी मिलेगा भारत में नागरिकता का अधिकार। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पीठ के मुताबिक सभी को अपनी निजी जिंदगी जीने का पूरा अधिकार है।

एलजीबीटी के इसी अधिकार को प्राथमिकता देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला बदल कर 377 धारा को गैरकानूनी बताकर गुरुवार को एक नया फैसला सुना कर नया इतिहास रचा। समलैंगिक संबंध बनाने वालों को अपराध मुक्त किया।

 

 अंजली चौहान

 

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