NATIONAL SPORTS DAY 2018 || भारतीय खेल दिवस का इतिहास

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NATIONAL SPORTS DAY 2018

भारतीय खेल दिवस का इतिहास

29 अगस्त राष्ट्रिय खेल दिवस के रूप मे मनाया जाता है। यह दिवस मेजर ध्यान चंद जी के जन्म दिवस के अवसर पे बनाया जाता है। वे केवल अपने समय के ही नहीं बल्कि अब तक के समय के सर्वश्रेष्ठ हाकी के खिलाड़ी माने जाते है।  खेल दिवस पूरे भारत मे बहुत लोकप्रिय है खासकर की विद्यालयो और विश्वविद्यालयो मे।

खेल दिवस की परंपरा

इस दिन भारत के राष्ट्रपति खेल रत्नो से खिलाड़ियो को गौरवांगीत करते है। खेल रत्न जेसे की द्रोणाचार्य, राजीव गांधी ओर अर्जुन रत्न दिये जाते है। सभी भारतीय इस दिवस को बड़े उत्साह के साथ आपस मे मिलकर हॉकी ओर कई खेल खेलके मनाते है।

मेजर ध्यान चंद जी और खेल दिवस का इतिहास

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ध्यान चंद जी माता श्रद्धा सिंह  और  पिता समेश्वर सिंह  के पुत्र थे जिंका जन्म 1905 मे हुआ था। उनका जनम अलाहबाद के पास कुशवाह मे हुआ था। इनके पिता भी हॉकी के शौकीन खिलाड़ी थे। वे ब्रिटिश भारतीय सेना के दल मे थे ओर अपने खालली समय मे हॉकी खेला करते थे। लाज़मी है धायन चंद को भी हॉकी खेलने का शौक उनके पिता के माध्यम से लगा होगा। हॉकी खेलने का जुनून उन्हे 16 साल से लगा जब उन्होने ब्रिटिश भारतीय सेना मे भाग लीआ था। वे रात के समय खेला करते थे जब बिजली तो ह नहीं पर चंद की रोशनी हुआ करती थी। इसी कारण वश उन्हे ‘चंद’  नाम से बुलाया जाने लगा। तभी से उनका नाम हुआ ध्यान चंद।

चंद जी ने भारत के लिए 1922 से लेके 1926 तक खेला। उन्होने कई सेना हॉकी के टूर्नामेंट्स मे खेला जिसके बाद वे भारतीय हॉकी मे चयनित होकर न्यू जीलेंड मे होने वाले टूर्नामेंट मे भाग लीआ।

उसके बाद से एक के बाद एक हॉकी की प्रतियोगिताओ मे भाग लेते रहे ओर भारत को कई जीते दिलाई। वे इतने महारथी थे की उन्हे हॉकी का ‘जादूगर’ कह जाता था। यहा तक की काफी प्रचाललित हुआ टनशाह भी उन्हे अपनी जर्मन की टीम के लिए खरीदना चाहता था।

 

प्रिया गुप्ता

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