America Challenges India’s Export Subsidy Program

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America Challenges India's Export Subsidy Program

America Challenges India’s Export Subsidy Program

अमेरिका ने भारत की एक्सपोर्ट सब्सिडी बंद कराने की दी धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत को मिलने वाली सब्सिडी को बंद करने की मांग को एक बार फिर विश्व ट्रेड संगठन (world trade organisation) के सामने रखते हुए कहा है कि अगर जल्द ही उनकी मांग नहीं मानी गयी तो विश्व भर के आधे  व्यापारों को प्रभावित करने वाली स्कीम्स को अमेरिका जल्द ही लॉन्च करेगा। डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को मिलने वाली एक्सपोर्ट सब्सिडी को अमेरिकी नीतियों के खिलाफ बताते हुए बड़े ही कड़वे शब्दों में कहा कि भारतीय निर्यातकों को ऐसी सहूलियत देना पागलपन है क्योकि सब्सिडी के कारण भारत अपने सामान को विश्व भर में सस्ते दामों में बेच सकता है और यह अमेरिका के कर्मिको और मनुफैक्चरस के खिलाफ है।
US Trade representative के मुताबिक स्पेशल इकनोमिक जोन (SEZ) में भारत दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी करता जा रहा है और भारत जैसे विकास शील देश को एक्सपोर्ट सब्सिडी देना अन्य विकासशील देशो के साथ नाइंसाफ़ी होगी।  यूएस ट्रेड रेप्रेज़ेंटेटिव का यह बयांन उस समय आया जबकि भारत के विदेश सचिब वियज गोखले अपनी पहली अमेरिकी यात्रा पर वहां पहुंचे।

सब्सिडी बंद होने से किन -किन चीज़ो पर पड़ेगा प्रभाव ?

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एक्सपोर्ट सब्सिडी के तहत भारत की नीतियां कुछ खास टैक्स और फी को माफ़ कर देती है जिससे भारतीय निर्यातकों को खासा लाभ मिलता है। इन नीतियों से स्टील, दवाईयाँ, केमिकल, इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल्स आदि निर्यातकों को लाभ मिलता है। एक्सपोर्ट सब्सिडी केहोने के बाद  स्टील, दवाईयाँ, केमिकल, इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल्स आदि सभी पर सात से आठ प्रतिशत वर्तमान दामों के मुकाबले बढ़ोतरी होने के अनुमान है। साथ ही मै टैक्स की मार होने के कारण दाम दस प्रतिशत तक भी बढ़ सकते है।

 करीब 7 अरब डॉलर का फायदा होता है भारतीय निर्यातकों को एक्सपोर्ट सब्सिडी द्वारा

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हर साल इन नीतियों द्वारा भारत सरकार के दस्तावेजों के मुताबिक भारतीय निर्यातकों को सात अरब डॉलर का लाभ होता है। अमेरिका के मुताबिक कुछ खास विकासशील देशो को निर्यात में ऐसी सब्सिडी से मिलने वाली छूट बाजार प्रतियोगिता की स्कीम्स के अनुचित है जिसे विश्व व्यापर संगठन ने भी कई हद तक सही माना है, लेकिन फिर भी विश्व व्यापर संगठन के नियमो के मुताबिक भारत और अमेरिका को पहले आपसी विचार कर खुद ही इस मुददे को सुलझाने का मौका दिया गया है लेकिन अगर दोनों राष्ट्र विचार -विमर्श में असफल रहते है तो विश्व व्यापर संगठन इस मामले की समीक्षा करेगा।

विदेशी कंपनीस को पड़ सकती है एक्सपोर्ट सब्सिडी की बंदी भारी

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मल्टी नैशनल कम्पनीज़ जो अपने व्यापार के विस्तार को बढ़ावा देने के लिए विश्व के हर देश में पहुंचने की कोशिश करती है उन्हें सब्सिडी का बंद होना भारी पड़ सकता है क्योकि इन कम्पनीज़ को देने वाले लाभ भारत इन्ही नीतियों के तहत देता था परन्तु नीतियों का बंद होना कम्पनीज को मिलने वाले लाभों का बंद होना भी होगा जिसके कारण बाहरी कम्पनीज को भारतीय बाज़ार  में रहने के लिए कुछ दामों को बढ़ाना होगा या अपने प्रॉफिट मार्जिन को घटाना होगा। होसकता है की इन कम्पनीज़ के प्रोडक्ट की डिमांड पर असर पड़े।  दोनों ही स्तिथियो में मल्टी नेशनल कम्पनीज पर प्रभाव पड़ने के पूरे पूरे आसार है।

क्यों किया अमेरिका ने ऐसा ?

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भारतीय सूत्रों के मुताबिक हाल ही में चल रही अमेरिका और चीन की ट्रेड वॉर के कारण बोखलाए अमेरिकी राष्ट्रपति ने वाशिंगटन के वाइट हाउस में बुलाई बैठक में चीन के विकास का कारण पता करना चाहा जिसमे काफी चीज़े शामिल थी उनमे से एक पॉइंट सामने आया चीन को मिलने वाली सब्सिडी का। अमेरिकी विशेषज्ञों ने बताया की चीन और भारत जैसे विकासशील देश ऐसी सब्सिडी के कारण विश्व भर में व्यापार को फैलाते जा रहे  ही में ऐसी नीतियों से अच्छा लाभ भी पा रहे है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन के खिलाफ भड़ास निकालने के लिए भारत को भी शामिल करते हुए विश्व व्यापार संगठन के सामने इस मुददे को प्रस्तुत करते हुए यह जाहिर किया कि अमेरिका भी विकास की राहो पर है और अमेरिका को भी ऐसी छूट प्रदान की जाए अन्यथा चीन और भारत जैसे देशो को एक्सपोर्ट सब्सिडी देना पागलपन है और इसे बंद किया जाए अन्यथा अमेरिका इसका विरोध करेगा।
BY- YASH GARG

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