Say No To “DOLLARS”

0
90
india uae trade relations

भारत ने यूएई के साथ कच्चे तेल का व्यापार डॉलर के बदले रुपयों में करने का फैसला लिया

भारत ने कच्चे तेल की खरीद में लिए अहम फैसले

india uae trade relations
भारत और अमेरिका की बीच चल रही कच्चे तेल के आयात को लेकर समस्याओ के चलते भारत ने यूएई के साथ कच्चे तेल का व्यापार डॉलर के बदले रुपयों में करने का फैसला लिया है। हाल ही में गृह मंत्रालय की अध्यक्ष सुषमा स्वराज ने अपने दो दिन के विदेशी दौरे पर यह अहम फैसला यूएई के साथ करार किया है जिसके मुताबिक अगले 90 दिनों तक भारतीय रिफाइनरी कंपनियां, नेशनल ईरानी कंपनी को कच्चे तेल का भुगतान रूपए में कर सकेगी।

अमेरिका ने प्रतिबंध लागू होने के बाबजूद दी कच्चा तेल खरीदने की छूट

india uae trade relations
5 नवंबर को विश्व भर में छिड़े हुए ट्रेड वॉर को सम्बोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान से तेल ख़रीदने पर भारत समेत अन्य सात देशो पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन पिछले दिनों हुई मीटिंग के दौरान सहमति ज्ञापन पर साइन करते हुए अमेरिका ने भारत समेत अन्य सात देशो को ईरान कच्चा तेल खरीदने की अनुमति दी है।

सिर्फ तीन लाख बैरल कच्चा तेल आयात कर सकेगा भारत प्रतिदिन ईरान से

प्रतिबंध हटाने के बाबजूद अमेरिका ने भारत को प्रतिदिन तीन लाख बैरल कच्चा तेल खरीदने की अनुमति दी है जबकि भारत को प्रतिदिन 560,000 बैरल कच्चे तेल की ज़रूरत होती है। तेल की पूर्ति को पूरा करने के लिए हो सकता है भारत अन्य देशो से तेल आयात करे। हालाँकि ईरान के बाद सिर्फ अमेरिका ही भारत के लिए एक मात्र तेल आयात का साधन है।

50% भुगतान उत्पादों से, 50% भुगतान रुपयों से

india uae trade relations
भारत द्वारा ईरान को खाद्य पदार्थ, दवाए और चिकित्सा उपकरणों का निर्यात किया जाता है। कच्चे तेल के आयात का भुगतान करने के लिए भारत 50% अपने निर्यात द्वारा व 50 % भुगतान रुपयों द्वारा करेगा। इससे दोनों देशो के बिच व्यापर और भी मज़बूत होगा एवं लोगो को हर चीज़ की पूर्णतः आपूर्ति हो सकेगी।

भारत चीन के बाद ईरान से तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीददार

india uae trade relations
जिस रफ़्तार से विश्व तरक्की कर रहा है उसमे एक योगदान भारत का भी है और इसीलिए भारत ईरान से प्रति बर्ष 1.5 करोड़ टन या 12.5 लाख टन प्रति महीना या 3 लाख बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन खरीदता है। भारत के उद्योगपति मुकेश अम्बानी ने बताया की हर इंडस्ट्री में मशीन्स को चलने के लिए तेल की ज़रूरत पड़ती है। यह भारत का दुर्भाग्य है की हमारे देश में कही भी तेल का उत्पादन नहीं होता अन्यथा देश में डीज़ल, पेट्रोल , अन्य तेलों के दाम आसमान पर न होते। अमेरिका अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए भारत के विकास को रोकना चाहता है इसलिए वे ट्रेड वॉर के जरिये भारतीय इंडस्ट्रीज को प्रभावित करना चाहता है।

आखिर क्यों भारत को कहना पड़ा !! SAY NO TO “DOLLARS” !!

india uae trade relations
सूत्रों के मुताबिक अमेरिका भारत और अन्य देशो पर अपना दबदबा कायम रखने के लिए भारत और अन्य देशो की डॉलर की आपूर्ति को पूरा नहीं कर रहा था जिसके कारण भारत जैसे विकासशील देशो के विकास का रोड़ा बन चूकी थी अमेरिकी मुद्रा $डॉलर क्योकि विश्व भर में सिर्फ डॉलर ही ऐसी मुद्रा है जिसके बदले में एक देश दूसरे देश से ट्रेड कर सकता है।
डॉलर की पूर्ति न होने के कारण भारत बाहरी देशो से अपने देश के लिए जरुरतमंद चीज़े जैसे कच्चा तेल आयात नहीं कर पा रहा था जिसके कारण पेट्रोल और डीज़ल के दाम पिछले कुछ दिनों में धुआँधार रफ़्तार से भड़ते चले गए थे। इसका निवारण खोजते हुए भारत और ईरान के बिच एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया जिसके अनुसार भारत अब ईरान से कच्चा तेल भारतीय मुद्रा यानि के रुपय के बदले में खरीद सकता है। इससे देश में चल रही तेल के दामों की समस्या पर आराम पाया जा सकता है और साथ ही में तेल की पूर्ति भी पूर्ण हो सकती है।
BY- YASH GARG

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here