How The World Around You Shapes Your Thoughts And Actions

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impact of society and culture on our thoughts

 जानिए कैसे हमारे आस पास का वातावरण हमारी सोच और कार्यो पर प्रभाव डालता है ?

impact of society and culture on thoughts
यह तो सत्य है कि हम जैसे वातावरण में रहते है हमारे विचार भी उसी  के हिसाब से परिवर्तित होते है क्योकि जैसा हम उस वातावरण में देखते  है वैसा ही हम प्राप्त करते है। नकारात्मक वातावरण, नकारात्मक सोच को जन्म देती है जो हमे निराशावादिता और नाकामी की और ले जाती है। वही सकारात्मक वातावरण सकारात्मक सोच को जन्म देती है जो हमे सकारात्मकता और सफलता की और ले जाती है।

क्या होता है नकारात्मक वातावरण ?

जिस जगह पर दिन के 24 घंटे में से दस घंटे नकारात्मक बाते होती है वहा पर नकारात्मकता उत्पन्न होती है और उस वातावरण में रहने वाले  लोगो की सोच भी धीरे धीरे नकारात्मक होती जाती है।

क्या प्रभाव पड़ता है नकारात्मक सोच से हमारी जिंदगी पर ?

जब हमारी सोच नकारात्मक हो जाती है तो हमें दुनिया के हर इंसान में बुराई नज़र आने लगती है। कोई चाहे कितना ही अच्छा काम क्यों न करले नकारात्मक सोच वाले व्यक्ति को उसके द्वारा किए गए कार्य में कमिया नज़र आने लगेगी और उस व्यक्ति की तारीफ करने के बजाय वह उसका उत्साह तोड़ते हुए उसके कार्य में उसे कमियां गिनाने लगेगा।

 क्या है अच्छी सोच का प्रभाव ?

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जीवन में परिवर्तन के लिए जरुरी है कि हम positive वातावरण में  रहे और positive सोचे क्योकि अगर हम एक दिन सुबह उठकर यह ठान ले की आज मै  पुरे दिन positive रखूँगा/रखूंगी तो निश्चित ही आपको हर कार्य में सफलता मिलती चली जाएगी। यदि हम सप्ताह भर भी ऐसा करते है तो हमारा दुनिया को देखने का तरीका बिलकुल बदल जायेगा और हमे जीवन जीने के सही मायने पता चलेंगे।
लेकिन क्या ऐसा हो सकता है ? अगर व्यक्ति कुछ ठान ले तो हर कार्य संभव है और इसका सीधा सीधा उदहारण है हमारे राष्ट्रिया पिता महात्मा गाँधी। गांधीजी ने सकारात्मक सोच के साथ सौ सालो  से गुलामी करने वाले अंग्रेज़ो से भारतीयों को आज़ादी दिलाई, यदि वह भी नकारात्मकता के साथ यह मान लेते की अंग्रेज़ ही भारत के करता धर्ता है तो शायद आज भी हम गुलामी की ज़ंजीरो में जकड़े हुए होते। जब एक व्यक्ति की सकारात्मक सोच पुरे देश को आज़ादी दिला सकती है तो सोचिए एक दिन सकारात्मक सोच के साथ आपकी जीवनशैली पर कितना प्रभाव पड़ सकता है।

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संगति का प्रभाव

कई बार हम ऐसे लोगो की  संगति में फंस जाते है जो पूरा समय हमारे सामने  बस अपना दुखड़ा रोते रहते है और ऐसे दिखते है जैसे उन्हें जिंदगी में कभी ख़ुशी मिली ही न हो। अगर हम ऐसे लोगो के साथ रहते है तो हम भी उन्ही की तरह सोचने लगते है। इसलिए जरूरी है की हम ऐसे लोगो की संगती में रहे जो खुशनुमा माहौल की अनुज्ञाता हो।

गुस्से को जन्म देती है नकारात्मकता

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जब व्यक्ति नकारात्मक सोच का शिकार हो जाता है तो उसे दुनिया में हर चीज़ में कमी दिखने लगती है और जब वह उसे अपने हिसाब से कण्ट्रोल नहीं कर पाता तो उसके स्वाभाव में उत्पन होता है गुस्सा।  इसलिए ज़रूरी नहीं की आप पुरे दुनिया की टेंशन लेकर घूमे क्योकि जिस कार्य को करने में व्यक्ति सक्षम नहीं हो पाता वह उस कार्य के पूर्ण न होने के कारण गुस्सा करने लगता है।

अच्छे काम में मन लगाए

कई बार व्यक्ति का कार्य इतना तनावपूर्ण होता है की वह टेंशन में जीने लगता है और टेंशन के साथ साथ व्यक्ति चिड़चिड़ा और गुस्सैल हो जाता है। इसलिए जरुरी है की दिमाग में नकारात्मक विचार आए उसके पहले ही खुद को ऐसे कार्य में व्यस्थ करे जिससे आपको मानसिक शान्ति मिले जैसे की मधुर संगीत सुन्ना, मौज मस्ती करना, आदि के माध्यम से आप तनाव  और नकारात्मक खयालो को दूर कर सकते है।

कैसे सकारात्मक सोचे ?

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सकारात्मक सोच के लिए जरुरी है की आप उन विचारो  के बारे में सोचे जो आपके मूड को ठीक कर दे और आपके जीवन में खुशियों के रंग भर दे, ऐसे विचार लाए जो आपको कठिन परिस्तिथियों से बाहर निकाले और जो कार्य आप कर रहे है उसमे सफल होने की राह दिखाए। जीवन को कठिनाइयों से मुक्त करने का एक ही है सरल उपाय सकारात्मक वातावरण में रहे और रखे सकारात्मक सोच ताकि आप अपने मन को नकारात्मक सोच के दायरे से बहार ले जा सके और जीवन परेशानी और बाधा रहित बना सके।
BY- YASH GARG

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