इस नवरात्रे मन ही नहीं शरीर भी होगा शुद्ध

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इस नवरात्रे मन ही नहीं शरीर भी होगा शुद्ध

यूँ तो नवरात्र साल में दो बार मनाया जाता है, पर देश के अधिकाँश हिस्सों में शारदेय नवरात्र को ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है।  नवरात्र के नौ दिन पारम्पारिक रूप से माँ दुर्गा की आराधना, प्रार्थना और व्रत के दिन हैं।  ये नौ दिन आत्मिक और शारीरिक शुद्धि के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।  एक तरफ पूजा-अर्चना और ध्यान के माध्यम से मन की शुद्धि का लक्ष्य प्राप्त किया जाता है, तो दुसरी तरफ व्रत आदि के माध्यम से शारीरिक शुद्धि यानी डिटोक्सिफिकेशन का लक्ष्य सफल होता है।  चैत्र और शरद दोनों नवरात्र एक तरह से बदलते मौसम की दस्तक देने भी आते है।  यही वजह है कि नवरात्र के व्रत को दैनिक रूटीन में बदलाव लाने और शरीर को एक नई ऊर्जा से भर देने के लिए उपयुक्त माना जाता है।

दुर्भाग्यवश अधिकाँश लोग नवरात्र के व्रत को शारीरिक शुद्धि के अवसर के रूप में नहीं लेते हैं।  ऐसे लोगों का फलाहार भी भरपूर फैट, कैलोरी और मीठे से भरपूर होता है।  कैलोरी से भरपूर ये फलाहार व्रत के मूल लक्ष्य के आस-पास भी नहीं पहुँच पाते।  इनसे शरीर को लाभ की जगह नुक्सान ज्यादा होता है।  आप नवरात्र के व्रत के दौरान इस तरह की गलती करने से बचें।  नौ दिनों के व्रत को शरीर के भीतर से सारे टॉक्सिन्स को बहार निकालने के मौके के रूप में देखें और अपने लिए आहार का चुनाव भी उसी के मुताबित करें।

healthy diet during navratri

  • विशेषज्ञ मानते है की व्रत रखना पेट और आतों को आराम पहुंचता है।  स्वास्थ्य पर इसका बेहतर असर पड़ता है और शरीर डेटॉक्स भी होता है।  मतलब शरीर से गंदे तत्व निकल जाते हैं।  पर हाँ, लिक्विड डाइट कैलोरी का विकल्प नहीं हो सकती हैं।  सिर्फ लिक्विड लेने से जल्दी-जल्दी पेशाब आता है, जिससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट कम होते जाते हैं। इसलिए दिन भर में एक बार खाना जरूर खाना चाहिए।  अगर आप व्रत के दौरान सिर्फ रात में अनाज का सेवन करते हैं तो दिन भर किसी-न-किसी रूप में तरल पदार्थों का सेवन करते रहें।  नारियल पानी व हर्बल टी आदि शरीर से टॉक्सिन्स को बहार निकालने के अलावा इलेक्ट्रोलाइट को संतुलित रखने में सक्रीय भूमिका निभाते हैं।
  • वजन बढ़ने का एक कारण कमज़ोर मेटाबोलिज्म होता है. पर, क्या आप जानती हैं कि व्रत करने से लेप्टिन नाम के हॉर्मोन का स्त्राव बढ़ता है जिसके कारण शरीर का मेटाबोलिज्म दुरुस्त रहता है और वजन नियंत्रण में रहता है.
  • शरीर को भीतर से साफ़ करने के लिए फलों और दही को मिलाकर शेक तैयार करें और पिएँ. दूध वाले शेक के तुलना में यह ज्यादा फायदेमंद होता है.
  • अगर आप डायबिटीज के मरीज है तो इतने लम्बे वक्त तक व्रत रखने से बचें। साथ में कार्बोहड्रेट की पूर्ति की ओर पूरा ध्यान रखें, क्योंकि ऐसा न करने से सेहत पर नकरात्मक असर पड़ सकता है।  जूस की जगह फलों का सेवन करें, क्योंकि जूस के साथ अचानक शुगर बढ़ने का डर रहता है।
  • नवरात्र के नौ दिनों के दौरान फल, लस्सी, नीबू पानी, सेंधा नमक आदि से भरपूर सात्विक आहार के सेवन से पांचन तंत्र को आराम पहुंचता है और परिणामस्वरूप कब्ज जैसी समस्याओं से भी राहत मिलती है.
  • नवरात्र के व्रत के माध्यम से आप माँ दुर्गा की आराधना, आत्म-नियंत्रण के साथ-साथ वजन को कम करने के लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकती हैं. व्रत करने की वजह से शरीर ऊर्जा पाने के लिए मुख्य अंगों जैसे किडनी व् लिवर आदि के आसपास इखट्ठा अतिरिक्त फैट का इस्तेमाल करने पर मजबूर हो जाता है. इससे न सिर्फ वजन काम होता है बल्कि शरीर के इन प्रमुख अंगों की कार्यक्षमता भी बेहतर होती है.
  • व्रत के दौरान दूध और दूध से बनी चींजें खाना जरूरी होता है. फिर चाहे आप दूध, दही या पनीर खाएं. कुछ लोगों को दूध से गैस की परेशानी हो जाती है तो वो मट्ठा, दही या पनीर खा सकते हैं. फैट से बचना है तो फुल क्रीम  की जगह, टोन्ड दूध का इस्तेमाल करें. इसके साथ ही अगर सिर्फ लिक्विड डाइट पर हैं तो ओर ज्यादा ध्यान रखना होगा.

~ स्टैफी ब्रिज़ावार

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