50% तक महगें होंगे दिवाली पर बिकने वाला सजावटी सामान 

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इस साल दिवाली पर निकलेगा आम आदमी का  दिवाला

दिवाली आने में अब सिर्फ कुछ ही दिन बाकि रह गए है लेकिन इस साल की दिवाली आम आदमी का दिवाला निकालने वाली है। विश्व में चल रहे इकनोमिक वॉर और रूपए का दिन प्रतिदिन डॉलर के सामने कमज़ोर होने से इस साल दिवाली पर बिकने वाले सजावटी सामान तीस से पचास प्रतिशत तक महंगे हो गए है।
दिल्ली के थोक मार्किट सदर बाजार, चांदनी चौक और भागीरथी  जहाँ दीवली आने के दो महीने पहले से ही इतनी भीड़ हो  जाया करती थी वहा इस वर्ष माहौल थोड़ा हल्का मालूम पड़ता है। भागीरथी पैलेस  के  कारोबारियों का कहना कि इस साल दिवाली पर चीन से आने वाली लाइट्स और झालरों जैसे सजावटी सामानो को कई कारणो की वजह से  भारतीय मार्किट में कम इम्पोर्ट किया गया है जिसकी वजह से डिमांड ज्यादा है और माल कम। तथा जीएसटी की भड़ती कर दरों कारण भी सामान तीस से पचास फीसदी मेहेंगा होने का अनुमान है।

क्यों भड़े झालर और  लाइटो के दाम ?

भारत में दिवाली पर लाइट और झालरों का  चीन से बहुत बड़ा व्यापार होता है। सस्ता और आकर्षित होने के कारण ग्राहक चीनी माल को लेना ही पसंद करता है लेकिन,  साल 2018 में जुलाई से रुपये के डॉलर के सामने 15 फीसदी तक  कमज़ोर होने के कारण चीन के आपूर्तिकर्ताओं  ने इस बार कारोबारियों से पहले ही  पेमेंट ले लिया ,उसके बाद माल दिया है जिसके कारण भारतीय मार्किट से छोटे कारोबारियों को भारी घाटे का सामना करना पड़ा है। इस वजह से आमतौर पर सस्ती बिकने वाली  चीनी लाइटो और झालरों का आयात लगभग थम गया है।
कुछ व्यापारियों ने तो सिर्फ पुराने स्टॉक से ही इस साल  दिवाली पर गुजारा करने का निर्णेय लिया है क्योकि नया माल पिछले साल के मुकाबले  दोगुने दाम पर मिल रहा है जिसके कारण छोटे व्यापारियों ने नया माल न खरीदने को मज़बूर हो गए है।

ड्राई फ्रूट्स भी हुए महँगे, मिठाइयों  की कीमत पर भी पड़  सकता है असर

ज्यादातर ड्राई फ्रूट्स अमेरिका से आते है। पिछले साल 650 से 800 रूपये किलो की रेंज में बिकने वाले बादाम की कीमत इस साल 700 से 1100 रूपए किलो होने का अनुमान है। वही पिस्ते और काजू के दाम भी चढ़कर ही सामने आने के अनुमान है।
जहा एक और रुपया 15 फीसदी तक गिरा है, सरकार ने भी मौके का फायदा उठाकर ड्राई फ्रूट्स पर टेर्रिफ बड़ा दिया है जिसके कारण बादाम पिस्ता काजू आदि ड्राई फ्रूट्स की कीमत 30 से 45 % तक भड़ी है। वही ऊचे भाव में ख़रीदे हुए काजू बादमो का सौदा जल्द से जल्द निपटाने में लगे हुए इम्पोर्टर्स ने कीमतों में खुद की तरफ से 15% तक की छूट देने के बारे में सोचा है। लेकिन जैसे जैसे रूपए में गिरावट आएगी, दाम ऊपर की और ही रुख करेंगे। वही बढ़ते ड्राई फ्रूट्स की कीमतों का असर मिठाइयों पर भी देखने को मिल सकता है क्योकि ज्यादातर मिठाइयों में ड्राई फ्रूट्स का प्रयोग होता है ही, और भड़ती हुई ड्राई फ्रूट्स की कीमते मिठाइयों को भी महंगा कर सकती है।

जीएसटी लागू होने के बाद कारोबारी नाराज़, हुए धंधे चौपट

जीएसटी के आने के बाद से बाजार में इतनी सख्ती बढ़  गयी है की चीज़ो पर  दाम बढ़ाना मज़बूरी हो  हो गयी है। फेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के महासचिव ने बताया कि जीएसटी के बाद से कारोबारी परेशान है। पहले छोटे कारोबारियों का सिर्फ राज्य कर अधिकारियो से वास्ता पड़ता था लेकिन जीएसटी के बाद से उन्हें केंद्र और राज्य दोनों के कर अधिकारियो से निपटना पड़ता है जिससे तंग आकर उन्होंने बहार से सामान मंगवाना कम कर दिया है जिसके कारण उनकी ग्राहकी पर फर्क पड़ा है।
दरअसल छोटे व्यापारियों का जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाना जरुरी नहीं है लेकिन एक राज्य से दूसरे राज्य में माल भेजते में अधिकारी वहां को रोक लेते है और जीएसटी बिल मांगते है जो न होने पर व्यापारियों को भारी जुर्माना भरना पड़ता है। व्यापारियों का कहना है कि यह सरकार दोगली है, जीएसटी लागू करते वक़्त यह नहीं बताया गया था कि एक राज्य से दूसरे राज्य में माल भेजने के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन जरुरी है।  माल की कम खपत और टैक्स की भारी मार के चलते  कारोबारीयो का सामान के मूल्यों में वृद्धि करना आवश्यक हो गया है।
BY- YASH GARG

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