जीएसटी और नोटबंदी से देश के आर्थिक विकास को लगा झटका ?

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demonetisation slows down indian economy

 

Demonetisation Slows Down Indian Economy

RESERVE BANK OF INDIA (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के अनुसार जीएसटी और नोटबंदी से देश के आर्थिक विकास को लगा झटका।

यूँ तो देश में चल रही हर राजनीति की खबर आग की तरह तुरंत वायरल हो ही जाती है। मोदी सरकार के दो बड़े बदलावों से तो पूरा देश रूबरू है ही लेकिन क्या आपको पता है, जीएसटी और नोटबंदी से देश की आर्थिक वृद्धि को लगा एक ज़बरदस्त झटका जिसके कारण पिछले कुछ सालो के मुकाबले भारत साल 2018  के अंत में 7 प्रतिशत कमज़ोर हालातो में खड़ा है। एक इंटरव्यू के दौरान भारत के रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर राजन ने बताया कि जीएसटी और नोटबंदी बनी आर्थिक वृद्धि की अड़चन।

केंद्रीकृत व्यवस्था से नहीं चल सकता देश

राजन ने अपने भड़के हुए जवाबो के साथ यह साफ जाहिर कर दिया के देश को  चलाने के लिए सभी की सहमति जरुरी है लेकिन देश में चल रहे राजनैतिक माहौल के अनुसार आज भारतीय सर्कार बेहद केंद्रीकृत है। राजनैतिक फैसलों की व्यवस्था सिर्फ और सिर्फ केंद्र के अधिन  कारण देश  अर्थव्यवस्था दिन प्रतिदिन कमज़ोर पड़ती जा रही है। भारत  सिर्फ एक केंद्र से काम नहीं कर सकता, देश  चलाने के लिए सभी की राय जरुरी है।

वित्त मंत्री की ज़िद पर लागू हुए नोटबंदी और जीएसटी जैसे एहम फैसले

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राजन के अनुसार देश को दो बड़े बदलावों को झेलने के लिए कुछ समय की ज़रूरत थी लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मात्र आठ महीनों के अंतराल में पहले केंद्र द्वारा नोटबंदी के फैसले को हरी झंडी दिलवाई और फिर जीएसटी एक्ट लागू कराया जिसके कारण मध्यम वर्गी शहरी लोगो और किसानो पर काफी प्रभाव पड़ा है।  2012-16 के बिच भारत की आर्थिक वृद्धि काफी तेज़ थी, लेकिन 2017 में गति सुस्त पड़ गई।

देश के बैंको को चाहिए और मनी

नीरव मोदी के पंजाब नेशनल बैंक और अन्य बैंको से धोखाधड़ी के बाद देश की बैंको पर खासा प्रभाव पड़ा है जिसके कारन लोन मिलना हुआ मुश्किल, दर कीमते भड़ी और लोगो का कमर्शियल बैंक्स के प्रति विश्वास डगमगाने लगा है। देश की आर्थिक मज़बूती का एक एहम हिस्सा बैंको से होने वाली कमाई भी है जो की भारतीय अर्थव्यवस्था में अपना 22% योगदान देती है। राजन के अनुसार अगर बैंको में और रुपया केंद्र की तरफ से दे दिया जाये तो लोग बैंको से आर्थिक मदद यानि लोन्स के लिए और अग्रसर होगी और बैंक उनसे दर प्राप्ति द्वारा अपनी कमाई को और भड़ा सकेगी।

आम आदमी का  बिगड़ेगा बजट

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जाहिर है की देश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को  सुधारने के  लिए केंद्र सरकार   फिरसे टैक्स दरे बढ़ा सकती  है जिसके कारण आम आदमी अपने बजट को लेकर एक बार फिर परेशान हो सकता है। हालाँकि इस बात   पुष्टि अभी तक नहीं हुई है की किन -किन चीज़ो के दामों में वृद्धि हो सकती है।

बकौल रघुराम राजन, देश के लिए तीन  मौजूदा चुनौतियां

1. अनुयोजित बुनियादी संरचना –

 निर्माण उद्योग अर्थव्यवस्था को बुनियादी आधार देता है। देश में करीब 10 लाख से ज्यादा प्रोजेक्ट्स ऐसे है जिनकी रेजिस्ट्री होने के बाबजूद लोगो को उनके हक़ की ज़मीन,घर या अपार्टमेंट में फ्लैट नहीं मिले है जिससे यह साफ साफ पता चलता है की उद्योगपतियों ने लोगो के हक़ का रुपया उन्ही के नाम से गवर्नमेंट के सामने पेश करके दिखा रखा है। इसलिए ज़रूरी है की लोगो को उनके हक़ का घर दिलाया जाये और उद्योगपतियों से लोगो के हक़ का रुपया निकलवाया जाए।

2. बिजली क्षेत्र की बाधाए

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बड़े ही आश्चर्य की  बात है कि देश की प्रगति का सबसे बड़ा एक रोड़ा बिजली बनी हुई है। हालांकि भारत के  गांवो में काफी प्रोजेक्ट्स ऐसे चल रहे है जिनसे घर घर बिजली पहुंचाई जा सके। राजन के अनुसार बिजली क्षेत्र की बाधाए दूर करना आपातकालीन लक्ष्य होना चाइए   ताकि उत्पादित बिजली जरुरतमंदो तक पहुंचाई जा सके।

3. बैंको के लिए बेहतर प्लानिंग

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महज हाल ही में हुए घोटालों के बाद देश की बैंक्स के लिए सिर्फ करप्सी कॉड काफी नहीं। बैंको को अपनी बैलेंस शीट साफ रखने  के लिए बेहतर प्लानिंग की जरुरत है ताकि हर एक गलती को तुरंत परखा जा सके और घोटालो से निजात पाया जा सके।
BY-YASH GARG

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