वायुमंडल जो कर रहा सभी जीवों का बचाव, उसका ही हम सब मिलकर कर रहे नाश…

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 क्या है वायु प्रदूषण, उसके कारण, प्रभाव और बचाव ?

 

वायुमंडल हमारे पर्यावरण का एक अति आवश्यक हिस्सा है। वायुमंडल से हमें वायु मिलती है, जिसके कारण हम पृथ्वी पर अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वायु मानव जीवन के लिए अति आवश्यक है और मानव जीवन का वायु के बिना कल्पना करना भी बेकार है। मनुष्य वायु से ही सांस लेता है और मनुष्य एक दिन में लगभग 20 बार सांस लेता है। और इस सांस लेने की प्रक्रिया में वह लगभग 35 पौंड वायु का प्रयोग करता है। इसी वायु के कारण मनुष्य के अंदर प्राण है। ऐसा कहें वायु ही हमारा जीवन है। अगर ऐसी प्राण देने वाली वायु ही प्रदूषित हो जाए, प्राणघातक बन जाए तो  हमारा जीवन संकट में पड़ जाएगा।

 

क्या है वायु प्रदूषण ?

वायुमंडल में अनेक गैस उपस्थित है जिनमें ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड आदि गैस है। पर्यावरण में इनका संतुलन समान रहता है। अगर इनका संतुलन बिगड़ जाए तो यह प्रदूषण का कारण बन जाती है। और वायु को अशुद्ध बना देती हैं। वायु को प्रदूषित करने वाले कण धूल मिट्टी और कार्बन डाइऑक्सइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड है।

 

वायुमंडल जो कर रहा सभी जीवों का बचाव, उसका ही हम सब मिलकर कर रहे नाश…

पुराने समय में मानव के सामने प्रदूषण जैसी कोई समस्या नहीं थी। मानव पहले अपनी जरूरतों के लिए इतना प्रदूषण प्रकृति में नहीं फैलाता था। अगर यह थोड़ा बहुत प्रदूषण होता भी था तो प्रकृति उसे संतुलित कर देती थी। लेकिन आज मानव अपनी प्रगति के पथ पर इतना अग्रसर हो गया है कि प्राकृतिक संसाधनों को सीमित दर से ज्यादा उपयोग करके वह उन्हें नष्ट करता जा रहा है। जिससे कि प्राकृतिक वायु में प्रदूषण फैल रहा है।

विश्व में बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए आवास की समस्या बढ़ती जा रही है। इस आवास की समस्या को सुलझाने के लिए लोगों ने बस्तियों का निर्माण किया जिनसे जल निकासी, नालियों आदि की समुचित व्यवस्था ना होने के कारण वायु में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। उद्योगों से निकलने वाले धुएं, बड़े-बड़े कारखानों से निकलने वाले रसायन, कृषि के द्वारा खेतों में उपयोग होने वाले अनेक प्रकार के रसायन, यह सभी वायु प्रदूषण के बहुत बड़े कारण है।

 

फैलेंगी इस धरती पर बीमारियां हजार और हो जाएगा यहां पर जीवन समाप्त….

 

  • यदि वायुमंडल में लगातार कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसे कण मिलते रहेंगे तो यह वायु को प्रदूषित कर देंगे। ऐसे प्रदूषित वातावरण में सांस लेने से सांस संबंधित बीमारियां हो जाएंगी। इसके साथ ही उल्टी घुटन, घुटने के दर्द, आंखों में जलन आदि बीमारियां हो जाएंगी।
  • कारखानों, वाहनों से निकलने वाले धुएं में सल्फर डाइऑक्साइड होता है। जो आसमान में जाकर वापस बूंदों के तौर पर बारिश में भूमि पर आता है और भूमि को प्रदूषित कर देता है। यह भूमि पर सल्फाइड या सल्फ्यूरिक अमल के रूप में आता है, जो उत्पादन की वृद्धि कम कर देता है। और साथ ही साथ सल्फर डाइऑक्साइड दमा रोग भी पैदा करता है।

 

 

कैसे वायु प्रदूषण पर करें नियंत्रण….

  • कारखानों को शहरी क्षेत्रों से दूर स्थापित करें।
  • जनसंख्या संबंधित शिक्षा लोगों को देनी चाहिए जिससे की जनसंख्या पर नियंत्रण किया जा सके।
  • रसायनों का कम से कम उपयोग करें।
  • ज्यादा से ज्यादा पर्यावरण में पेड़ पौधे लगाएं उन्हें कम से कम काटे।

 

                                –  अंजली चौहान

 

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