कारगिल जीत से परमाणु परीक्षण तक, वाजपेई जी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के विशेष अंश….

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वाजपेई जी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के विशेष अंश

वाजपेई जी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के विशेष अंश

  • हमारे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई’ जी का निधन गुरुवार शाम 93 साल की उम्र में हो गया।
  • भारत में 1999 में कारगिल युद्ध वाजपेई जी के नेतृत्व में जीता।
  • वाजपेई जी को कारगिल युद्ध में परिस्थितियां संभालने और उसकी जीत के लिए आज भी सराहा जाता है।
  • अटल जी ने अपने 11 महीने के प्रधानमंत्री के कार्यकाल में मई 1998 में परमाणु परीक्षण के आदेश दिए।
  • वाजपेई जी ने परमाणु परीक्षण के आदेश अपनी सरकार के सत्ता में 1 महीने के आने के बाद ही दे दिए थे।

वाजपेई जी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के विशेष अंश

 अटल जी की सूझबूझ…..

अटल बिहारी वाजपेई जी भारत के 3 बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। पहला 13 दिन के लिए (1966), दूसरा 11 महीने के लिए (19981999),तीसरा पूरा 5 साल का कार्यकाल (1999 से 2004)।

भारत कभी नहीं भूल पाएगा ऐसे शख्स, कवि, लेखक और राजनेता को जो हमारे पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके है, अटल बिहारी वाजपेई जी जिन्होंने भारत के रिश्ते को पाकिस्तान के साथ ना सिर्फ सुधारने की कोशिश की, बल्कि उस में शांति और मजबूती लाने के भी काफी प्रयास किये।

आइए जानते हैं उनके कार्यकाल की कुछ विशेषताएं…..

 कारगिल युद्ध

कारगिल के युद्ध में भारत ने जिस तरह पाकिस्तान मुल्क को हराया और धूल चटाई, उस जीत के पूरे हकदार अटल बिहारी वाजपेई जी ही है। यूं कहें कि कारगिल युद्ध में शहीद जवानों की शहादत को आज इतना सम्मान और इज्जत दी जाती है, वह सब अटल बिहारी वाजपेई जी की ही देन है।

भारत ने 1999 में पड़ोसी देश पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध की लड़ाई लड़ी थी, जिसमें भारत ने विजय प्राप्त की थी। और इस सब के जिम्मेदार सिर्फ अटल बिहारी वाजपेई जी ही थे। उन्होंने परिस्थितियों को इतनी अच्छी तरह से संभाला और हमारे भारतीय सैनिकों का नेतृत्व किया। पाकिस्तान ने तो कारगिल युद्ध में शहीद अपने सैनिकों का शव लेने से भी मना कर दिया था। लेकिन भारत में जितने भी सैनिक शहीद हुए थे, उनकी शहादत के लिए उन सभी के शवों को उनके पैतृक गांव भेजा गया था। उनका अंतिम संस्कार करवाया गया था। आज अगर भारत में कोई भी सैनिक शहीद होता है तो उसके परिवार को आर्थिक सहायता दी जाती है। और यह सब हमारे अटल बिहारी वाजपेई जी की ही देन है।

कारगिल युद्ध में शहीद जो भी जवान, अफसर थे उनके परिवारों के लिए कहीं ना कहीं देश में सड़के, कॉलोनियां और पुल बनवाए गए हैं। उनके परिवार वालों को पेट्रोल पंप, आर्थिक सहायता, मकान वगैरह आगे का जीवन व्यतीत करने के लिए दिए
गए हैं।

 वाजपेई जी का अद्भुत नेतृत्व

1998 की सर्दियों में कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर पाकिस्तानी और आतंकवादियों ने घुसपैठ कर ली थी। जिसकी खबर भारतीय सेना को गर्मियों की शुरुआत में लगी। इसके बाद 8 मई से शुरुआत हुई सैन्य ऑपरेशन की “ऑपरेशन विजय” जो 26 जुलाई को जाकर खत्म हुआ। इस कारगिल युद्ध में 527 भारतीय सैनिक शहीद हुए और 1363 सैनिक घायल हुए।वाजपेई जी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के विशेष अंश

कारगिल युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 3000 सैनिकों को मार गिराया था। इस कारण विरोध के बीच पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने अटल बिहारी वाजपेई को एक प्रस्ताव भेजा था। यह कि हम आपस में बैठकर बातचीत कर लेते हैं। तब अटल बिहारी वाजपेई जी ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। यह कहकर कि जब तक पाकिस्तान की सेना वहां से वापस नहीं जाएगी तब तक यह युद्ध होता रहेगा। कारगिल का युद्ध 2 महीने में भारतीय सेना ने पाकिस्तान से जीत लिया था। और पाकिस्तानी सैनिकों को भागने पर मजबूर कर दिया था। इस सब का नेतृत्व अटल बिहारी वाजपेई जी ने किया था।

 

 

                                     …….अन्जली चौहान

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