क्या आप जानते हैं, भारत पर किन 11 विदेशियों ने राज किया था ??

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आईये जानते है भारत का इतिहास

हिंदू और मुसलमानों में धर्म और द्वेष की स्थिति सदियों से चली आ रही है जो आज तक फैली हुई है। भारत का इतिहास अंग्रेजों और वाम पंथियों ने लिखा है, जिसके कारण यह स्थिति पैदा हो गई। और भारत के लोग आज भी इसी झूठ और भ्रम में जीते चले आ रहे हैं। कोई भी सत्य का सामना नहीं करना चाहता है। भारत के इतिहास का सत्य कोई भी जानना नहीं चाहता है। लेकिन इतिहास को वैसे ही लिखा जाना चाहिए जैसा कि वह है। किसी भी तरह का इतिहास का सत्य छिपाना इतिहास के साथ खिलवाड़ करना है। जिस देश का अपना कोई सच्चा इतिहास नहीं होता उस देश के नागरिकों में गौरव बोध और राष्ट्रीयता का विकास नहीं होता और होना भी मुश्किल होता है। इस राष्ट्रीयता और गौरव की भावना को मिटाने के लिए भारत में अंग्रेजों और वाम पंथियों ने हिंदू और मुसलमानों के बीच भ्रम और द्वेष की भावना उत्पन्न की।

 क्या आप जानते हैं, उन विदेशी आक्रांताओं के बारे में जिन्होंने भारत पर शासन करके भारत की गौरव अस्मिता और राष्ट्रीयता को पूरी तरह नष्ट करने का प्रयास किया था??

भारत पर किन 11 विदेशियों ने राज किया था

नहीं ना, तो हम आज आपको बताते हैं कुछ ऐसे ही शासकों के बारे में, जिन्होंने भारत की संस्कृति को संरक्षण ही प्रदान नहीं किया बल्कि भारतीय जनता को जीने का अधिकार भी दिया।

 आइए जानते हैं भारत पर किन 11 विदेशियों ने राज किया था..

  • पहला विदेशी शासन

यूनानी शासन (ईसा पूर्व)– भूत काल में अफगानिस्तान भी भारत का हिस्सा था। यूनानियों ने सबसे पहले इसी हिस्से पर और कहे तो भारत के पश्चिमी छोर पर ही शासन किया था। भारत पर सबसे पहले आक्रमण कर शासन करने वाले बैक्टरिया के राजा थे। इन्हें भारत में यवन के नाम से जाना जाता है। यवन  शासकों में सबसे शक्तिशाली थे सिकंदर, जिसे उसके क्षेत्र में एलेग्जेंडर और भारत में अलक्षेंद्र के नाम से जाना जाता है। सिकंदर को राजा पोरस ने हरा दिया था। इसके बाद भारत में यवन शासकों के दो कल बने पहला डेमेट्रियस दूसरा यूक्रेटीदस। और यह दोनों यवन शासक भारत में कामयाब नहीं हो पाए।

 

  • दूसरा विदेशी शासन

शक शासन (123 ईसापूर्व से 200 ईस्वी)

शक भी विदेशी शासक ही हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराणों में शक की उत्पत्ति सूर्यवंशी से की गई है। पूरे पूरे भारत पर तो शक का भी राज नहीं रहा। इन्होंने भी छोटी-छोटी राज्यों पर ही आक्रमण कर राज किया है। अंत में चंद्र गुप्त विक्रमादित्य ने इस कुल को समाप्त किया।

 भारत पर किन 11 विदेशियों ने राज किया था

  • तीसरा विदेशी शासन

कुषाण शासन– कुषाण तिब्बत के यूची कबीले के लोग थे। कुषाण का शासन भारत में उत्तर पश्चिमी सीमा पर ही रहा है। कुशाण में कनिष्क सबसे शक्तिशाली थे। जिन्होंने भारत में कार्तिकेय की पूजा की स्थापना को बढ़ावा दिया। अंत में कनिष्क की मृत्यु के बाद, कुशाण शासन भी भारत में खत्म हो गया।

 

  • चौथा विदेशी शासन

हूडो़ं का शासन– पूर्व मध्य एशिया की एक खानाबदोश और बर्बर जाती थी हूड। उन्होंने दक्षिण भारत छोड़ पूरे भारत पर राज किया है। अंत में मालवा के राजा ने हूणों को हरा दिया। और हूड यही बस गए। भारत में बस कर उन्होंने यहां की कला, संस्कृति को अपनाया और अपना कर उन्हें बढ़ावा दिया।

 

  • पांचवा विदेशी शासन

अरब ईरानी शासन– अरब और ईरान के शासकों ने भी भारत के पश्चिमी छोर पर ही राज किया। और कुछ समय बाद वह भी भारत में ज्याद समय तक टिक नहीं पाए और यहां से परास्त होकर वापस चले गए।

 

  • छठवां विदेशी शासन

गजनबी तुर्क शासन– अरबों के बाद तुर्क ने भारत पर आक्रमण किया। और फिर यहां शासन करने लगे। तुर्क के महमूद गजनवी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया। आखिरी 17 आक्रमण उन्होंने सिंधु और मुल्तान के तटवर्ती क्षेत्रों के जाटों पर किया। जिसमें जाट पराजित हुए।

 

  • सातवाँ विदेशी शासन

 गोर तुर्क शासन– इस शासन में भारत पर मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराकर शासन किया। और बाद में वह यहां से गजनी वापस चला गया।

 

  • आठवां विदेशी शासन

गुलाम वंश– मोहम्मद गौरी जाने से पहले अपना सारा साम्राज्य कुतुबुद्दीन ऐबक को साँप गया था। जिसकी वजह से यहां पर गुलाम वंश का शासन शुरू हुआ। इस वंश का सिर्फ उत्तर भारत पर ही शासन था।

 

  • नवा विदेशी शासन

खिलजी वंश– खिलजी वंश के बाद लोदी वंश की शुरुआत हुई। जिसमें इब्राहिम लोदी बाबर के हाथों हारा और यहां से लोधी वंश का शासन समाप्त हो गया।

 

  • दसवां विदेशी शासन

मुगल और अफगान शासन– पहले बाबर और फिर कई मुगल शासकों ने पूरे भारत पर कई वर्षों तक शासन किया।

 

  • ग्यारहवां विदेशी शासन

अंग्रेजी शासन– 17 वी शताब्दी के प्रारंभ से ही अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी की शुरुआत हुई। जिससे कि अंग्रेजी शासन की शुरुआत हुई। जिसके बाद 1947 में अंग्रेजों ने शेष भारत का धर्म के आधार पर विभाजन कर दिया।

 

 

                                 –अन्जली चौहान

 

 

 

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