क्यों नहीं बन पा रही है हिन्दी भारत की राष्ट्रीय भाषा?

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क्या आप जानते हैं, भारत की राष्ट्रभाषा क्या है??

अगर मैं आपसे भारत के राष्ट्रीय चिन्ह के बारे में पूछती हूंक्या है भारत का राष्ट्रीय फूल?
भारत का राष्ट्रीय जानवर? भारत का राष्ट्रीय पक्षी? तो आप तुरंत इसका जवाब दे देंगे। पर अगर मैं आपसे भारत की राष्ट्रभाषा के बारे में पूछती हूं, तो आप इसका जवाब हिंदी बताएंगे। लेकिन जनाब इसका जवाब हिंदी नहीं है। भारत की राष्ट्रभाषा हिंदी नहीं है,तो फिर क्या है  भारत की राष्ट्रभाषा? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब….

भारत की राष्ट्रभाषा
अगर मैं आपसे कहती हूं कि भारत की राष्ट्रभाषा हिंदी है तो यह जवाब गलत है। हिंदी क्या बल्कि किसी भी भाषा को भारत में राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिला है। यह बड़ा ही चौंकाने वाला तथ्य है। लेकिन आप भी जाना चाहेंगे ऐसा क्या हुआ, ऐसा क्यों है कि भारत में राष्ट्रीय भाषा कोई भी नहीं है। अगर आपको इस तथ्य के बारे में जानना है तो आपको आजादी के तुरंत बाद के समय में जाना होगा। आइए जानते हैं ऐसा क्यों है….

किस भाषा को राष्ट्रिय भाषा बोला जाए?

भारत की राष्ट्रभाषा

आगामी 15 अगस्त को पूरा देश 72 वीं आजादी की  वर्षगांठ मनाएगा। और अभी कुछ माह पूर्व ही हमने 26 जनवरी को भारत की 65 गणतंत्र दिवस की वर्षगांठ मनाई थी। परंतु यह बड़े दुख की बात है कि हम आज तक अपने देश में राष्ट्रभाषा घोषित नहीं कर पाए हैं और ना ही राष्ट्र राज्य भाषा घोषित कर पाए हैं। जब भारत में संविधान लागू किया गया था, तब केंद्र सरकार ने भारत की राष्ट्रभाषा हिंदी को  घोषित नहीं किया था। परंतु सरकार के किसी भी औपचारिक काम के लिए अंग्रेजी भाषा को माध्यम
बनाया जाए एसा कहा गया था।

भारत में अधिकतर लोग हिंदी बोलते हैं, हिंदी जानते है, हिंदी पढ़ते हैं, हिंदी लिखते हैं, परंतु हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है। हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की कल्पना महात्मा गांधी ने की थी। क्योंकि  महात्मा गांधी गुजराती थे, उन्होंने शिक्षा अंग्रेजी में प्राप्त की थी, परंतु वे जानते थे कि राष्ट्रीय एकता के लिए और राष्ट्र में सभी समानताओं के लिए राष्ट्रभाषा का होना आवश्यक है। और हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के पीछे उनका जो तथ्य था, उनमें से एक बड़ा ही मजबूत तथ्य देश में हिंदी का व्यापक आधार होना था।

 

हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा क्यों नहीं बन पा रही है ?

अंग्रेज चले गए, लेकिन अंग्रेजी छोड़ गए यह तथ्य हम लोग मजाक में बोलते हैं। परंतु यह कहीं तक सही भी है। आज की पीढ़ी में अंग्रेजी बोलने का शौक चढ़ा है। जहां देखें वहां हर दफ्तर में अंग्रेजी में काम होता है। अगर आप अदालतों में चले जाएंगे अंग्रेजी में कामकाज, अंग्रेजी में कानून व्यवस्था, यहां तक कि आदेश भी अंग्रेजी में दिए जाते हैं। जिसके कारण भारत के लोग अंग्रेजी के शिकार और शोषित होते जा रहे हैं।

भारत की राष्ट्रभाषा

अगर हम इस बात पर विचार करें कि हिंदी राष्ट्रभाषा क्यों नहीं बन पा रही है। तो हम बताएं कि भारत हमारा देश है, वह बड़ा ही स्वप्नदर्शी और भावुक है। जहां अगर कोई शासन का अधिकारी हिंदी में कोई कथन या तथ्य कह देता है तो उसे हम उसका दायित्व नहीं, बल्कि ऐसा समझते हैं कि इसमें उसने कोई देश के ऊपर एहसान कर दिया है। यह गलती हमारी नहीं हमारे इतिहास की है। आजादी के तुरंत बाद बनी सरकार अंग्रेजी की इतनी अधीन हो गई थी कि हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में घोषित करना तो दूर उसे निजी जीवन में भी उतारने की कोई अपेक्षा नहीं थी और ना ही हो पा रही है।

 

 

 

अन्जली चौहान

 

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