कब सुलझेंगे भारतीय अदालतों में लंबित पड़े मामले ??

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jaago hindustan

भारतीय अदालतों में लंबित पड़े मामले

भारतीय अदालतों में तीन करोड़ से ज्यादा मामले निर्धारित पड़े हुए हैं, जिसमें से ज्यादातर 10 साल से लंबित पड़े हुए हैं सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय और अधीन न्यायालय में लगभग कितने मामले लंबित पड़े हुए हैं। इनका एक आंकड़ा नीचे दिया गया है

  • सर्वोच्च न्यायालय में लगभग 60,000 मामले लंबित हैं।
  • उच्च न्यायालय में लगभग 42 लाख मामले लंबित हैं।
  • जिला और अधिक न्यायालय में लगभग 2.7 करोड़ मामले लंबित है।

इन अधूरे पड़े मामलों की संख्या इतनी है कि अगर इन्हें सुलझानी बैठे तो 6.5 साल लग जाएंगे।

 

क्यों इतने ज्यादा मामले लंबित पड़े हुए हैं भारतीय न्यायालयों में ?

लगभग 5 करोड मामले हर साल न्यायालयों में दायर किए जाते हैं, जिसमें से दो करोड़ मामले न्यायाधीश निपटा देते हैं। इसके कारण हैं-

  1. आम आदमी की सामान्य अधिकार के प्रति जागरूकता।

आम आदमी को सामान्य अधिकारों की जानकारी होने से उनकी हिम्मत में बढ़ोतरी आई है जिससे कि वह अपने मामलों में न्यायालय में जाकर न्याय की गुहार लगाते हैं।

  1. न्यायाधीश की कमी होना

भारत में न्यायाधीश की संख्या अधिक नहीं है लगभग 21000 न्यायाधीश ही भारत में है। अगर हम अभी के न्यायाधीश की संख्या यहां की जनसंख्या के आंकड़ों से मिलाए तो यह 10 से 1 मिलियन रहेगी। जो कि बढ़ते हुए मामलों के मुताबिक बहुत कम है। भारत में लगभग आधी सीटें न्यायाधीश की सर्वोच्च और उच्चतम न्यायालय में खाली हैं, जिन्हें भरने के लिए यहां संघर्ष चल रहा है।

  1. न्यायालयों की कमी।
  • भारतीय न्याय तंत्र के पास अपर्याप्त साधन है। दोनों ही केंद्र और राज्य सरकार न्याय तंत्र के ऊपर पैसा खर्च करना नहीं चाहते हैं और ना ही इसे बढ़ावा देना चाहते हैं।
  • पूरे बजट का लगभग 0.1% से लेकर 0.4% तक ही न्याय तंत्र पर खर्च किया गया है।

 

  1. बढ़ते हुए अत्याचार के मामलों को देखते हुए, भारत को अधिक न्यायालयों अधिक न्यायाधीश की जरूरत है।
  • आधुनिकीकरण और कंप्यूटरीकरण अभी तक सभी न्यायालय तक नहीं पहुंचा है।
  • सरकार की तरफ से यहां बहुत ज्यादा मुकदमेबाजी हैं।
  • भारत में सबसे बड़ी मुकदमेबाज तो सरकार ही है। जो आधे से ज्यादा लंबित पड़े मामलों के लिए जिम्मेदार हैं।
  • इन मामलों में ज्यादातर एक सरकार का दूसरे सरकार पर मुकदमा करने का मामला है।
  1. निचले न्यायालयों में कम न्यायतंत्र गुणवत्ता
  • निचले न्यायालयों में कम गुणवत्ता के कारण सही फैसले नहीं लिए जाते। जिसके कारण अधिकतर मामले उच्चतम न्यायालय में दोबारा दायर किए जाते हैं।
  • न्यायाधीशों के पास कम विशेषज्ञता के कारण वह कम सक्षम और कामचोर होते जा रहे हैं।

भारतीय न्यायालयों में अधूरे पड़े  मामलों को सुलझाने का उपाय।

  • सरकार को तुरंत ही न्यायाधीशों की संख्या भारत में बढ़ाने की जरूरत है। जो अभी 21000 है उसे तुरंत ही 50000 तक बढ़ाने की आवश्यकता है।
  • जल्द से जल्द ही न्यायाधीशों की नियुक्ति सर्वोच्च और उच्चतम न्यायालय में कर देनी चाहिए।
  • अधिक न्यायालय का गठन होना चाहिए जैसे फास्ट ट्रैक कोर्ट, लोक अदालत और ग्राम न्यायालय ।

 

                                                                                                          –अंजलि चौहान

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