भारत के ‘अनमोल रत्न’ हमारे पूर्व प्रधानमंत्री- अटल बिहारी वाजपेई जी….

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भारत रत्न, कवि, राजनेता भारत का महान नेता, हमारे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी अब नहीं रहे।

16 अगस्त 2018 को 05.05 पर उन्होंने अपनी आखिरी सांसे दिल्ली के एम्स अस्पताल में ली

अटल बिहारी वाजपेई जी भारत का अनमोल रत्न, भारत का रत्न हमारे बीच  अब नहीं रहे। बाजपेई जी चार दशकों से भारतीय संसद में, राज्यसभा में दो बार निर्वाचित हो चुके हैं और लोकसभा में 10 बार निर्वाचित हो चुके हैं। वह संसद के सदस्य भी 2009 तक रह चुके हैं, जब उन्हें अपनी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण यह पद छोड़ना पड़ा। अटल बिहारी वाजपेई जी पहले ऐसे भारत के प्रधानमंत्री थे, जो कांग्रेस से संबंध नई रखते थे और उन्होंने अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा किया। प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नेतृत्व में अटल बिहारी वाजपेई जी ने वित्त मंत्री का भी कार्यभार संभाला है। वाजपेई जी को

अटल बिहारी वाजपेई
2015 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के द्वारा सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा गया है। आइए जानते हैं अटल बिहारी वाजपेई जी की जीवनी…..

 

जन्म      25 दिसंबर, 1924, ग्वालियर, मध्य प्रदेश

मृत्यु     16 अगस्त 2018 नई दिल्ली,   भारत

राजनीतिक दल    भारतीय जनता पार्टी,  (1980 – 2018 )

राजनीतिक संबंधता   जनता पार्टी, (1977 – 1980),  जन संघ (पूर्व1977)

शिक्षा संस्था     DAV कॉलेज कानपुर

व्यवसाय        राजनेता, कवि, लेखक

पुरस्कार        भारत रत्न (2015),   पद्म विभूषण (1992)

          

वाजपेई जी बचपन से ही बहुत बुद्धिमान थे सभी परीक्षाओं में आते थे अव्वल….

वाजपेई जी का जन्म कृष्णा देवी और कृष्ण बिहारी वाजपेई जी के यहां 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर, मध्य प्रदेश में हुआ था। वाजपेई जी के दादाजी बटेश्वर, उत्तर प्रदेश में रहते थे वहां से वह मुरैना ग्वालियर में बस गए। बाजपेई जी के पिताजी स्कूल में अध्यापक थे।  वाजपेई जी ने अपने स्कूल की शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल, ग्वालियर से प्राप्त की है। उसके पश्चात वाजपेई जी ने अपनी स्नातक की परीक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज, जो अब लक्ष्मीबाई कॉलेज के नाम से जाना जाता है वहां से हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत क्षेत्र में की है। उन्होंने स्नातक प्रथम श्रेणी से प्राप्त की। इसी के साथ उन्होंने स्नातकोत्तर m.a. पॉलिटिकल साइंस के भेद में DAV कॉलेज कानपुर से प्रथम श्रेणी से प्राप्त की है।

वह शुरुआत से ही बहुत विद्वान थे उन्होंने हर शिक्षा में हर परीक्षा में अव्वल श्रेणी प्राप्त की है।

वाजपेई जी युवा उम्र की कहानी….

अटल बिहारी वाजपेई

वाजपेई जी ने अपनी पूरी उम्र में शादी नहीं की। उन्होंने नमिता भट्टाचार्य जो कि राजकुमारी कौल और बीएन कॉल की पुत्री हैं, उन्हें गोद लिया और उनकी परवरिश की। अटल बिहारी बाजपेई जी को भारतीय संगीत और भारतीय नृत्य में बहुत दिलचस्पी थी। उन्हें प्रकृति से बहुत प्रेम था। उनकी सबसे पसंदीदा जगह मनाली थी जो कि हिमाचल प्रदेश में है। वह लेखक के साथ कवि भी थे। उन्होंने कई कविताएं और कई किताबें भी लिखी हैं।

वाजपेई जी 16 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य भी रह चुके हैं। अटल बिहारी वाजपेई जी ने महात्मा गांधी के साथ कई स्वतंत्रता संग्राम की आंदोलन की लड़ाई में हिस्सा लिया। उन्हीं में से एक था- भारत छोड़ो आंदोलन। जिसमें कि अगस्त 1942 में वाजपेई जी को उनके बड़े भाई के साथ 23 दिन के लिए जेल में डाल दिया गया था।

 

अटल बिहारी वाजपेई जी का कविता कोश….

अटल बिहारी वाजपेई

ठन गई !

मौत से ठन गई!

 

जूझने का मेरा इरादा ना था,

मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा ना था,

 

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,

यूं लगा जिंदगी से बड़ी हो गई।

 

मौत की उम्र क्या है? दो पल भी नहीं, जिंदगी सिलसिला, आजकल की  नहीं,

 

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं,

लौट कर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं।

 

तू दबे पांव, चोरी-छिपे से ना आ,

सामने वार कर फिर मुझे आज़मा।

 

मौत से बेख़बर, जिंदगी का हर सफर,

शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर।

 

बात ऐसी नहीं कि कोई गम ही नहीं,

दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं।

 

प्यार इतना परायों से मुझको मिला,

न अपनों से बाकी है कोई गिला।

 

हर चुनौती से दो हाथ मैंने किए,

आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए।

 

आज झकझोरता तेज तूफान है,

नाव भंवरों की बांहों में मेहमान है।

 

पार पाने का कायम मगर हौसला,

देख तेवर तूफाँ का, तेवरी तन गई।

 

मौत से ठन गई !

 

                                           ….अन्जली चौहान

 

10 COMMENTS

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